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ई-कचरा क्या है| ई-अपशिष्ट | कारण, प्रभाव चिंताएं और प्रबंधन |ई-अपशिष्ट प्रबंधन अधिनियम, 2016|E-Waste

ई-अपशिष्ट से तात्पर्य ऐसे अपशिष्टों से है जिसका निर्माण इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अनुपयुक्त एवं बेकार हो जाने से होता है। इनमें अनेक खतरनाक रसायन एवं भारी धातुएँ, जैसे – सीसा, कैडमियम, बेरिलियम पाए जाते हें। ये अपशिष्ट प्रदूषण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य के लिये भी खतरनाक हें।

2040 तक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के उत्पादन व उपयोग के कार्बन उत्सर्जन संपूर्ण उत्सर्जन का 14% तक पहुँच जाने का अनुमान है।

ई-अपशिष्ट प्रबंधन | e-waste management

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बेकार हो जाने से होता है इसके अंतर्गत हम भूमि भराव की वही प्रक्रिया अपनाते हैं जो ठोस अपशिष्ट में अपनाई जाती है। ई-अपशिष्ट प्रबंधन के लिये दहन प्रक्रिया भी एक कारगर उपाय है। इसके अलावा ई-अपशिष्ट उपचार की कुछ और तकनीक भी हैं जिनके द्वारा ई-अपशिष्ट का उपचार किया जा सकता है।

भारत में ई-कचरा उपचार की तकनीक | E-waste treatment technology in India

परिशोधन ( शुद्धीकरण )

इस प्रक्रिया में ई-अपशिष्ट में से पहले उसमें शामिल धातुओं को अलग किया जाता है, उसके बाद उसका परिशोधन किया जाता है।

विखंडन/विनष्टीकरण

इस प्रक्रिया के लिये पहले ई-अपशिष्ट को विखंडन फैक्ट्री में इकट्ठा किया जाता है तथा इसमें उपस्थित विभिन्न धातुओं को अलग-अलग डिब्बों में डाला जाता है। इस स्तर पर गैस एवं द्रव्य अलग हो जाता है। अगला चरण विखंडन का आता है।

इस प्रक्रिया के बाद जो धातु पुन: उपयोग के लायक है, उन उपलब्ध धातुओं को पुन: उपयोग के काम में लिया जाता है। इसके अतिरिक्त ई-अपशिष्ट प्रबंधन के लिये 4R’s  प्रक्रिया भी अधिक कारगर है

ई-परिसर

यह भारत की प्रथम वैज्ञानिक ई-अपशिष्ट पुनर्चक्रण इकाई है। यह इलेक्ट्रॉनिक व इलेक्ट्रिकल अपशिष्टों के पुनर्चक्रण व पुनः प्रयोग का कार्य करती है। इस इकाई की शुरुआत सितंबर 2005 में की गई थी।

इन्हे भी देखें –भारत के परमाणु ऊर्जा सयंत्र:( parmanu sayantra in india list 2022

ई-अपशिष्ट प्रबंधन अधिनियम, 2016 | E-Waste Management Act, 2016

  • मार्च 2016 में भारत के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा ई- कचरा (प्रबंधन तथा निपटान) नियम, 2011 में संशोधन कर ई-कचरा प्रबंधन नियम, 2016 को अधिसूचित किया गया है।
  • भारत में प्रत्येक वर्ष लगभग 17 लाख टन ई-कचरे का उत्पादन होता है तथा इसमें प्रतिवर्ष 5% की बढ़ोतरी हो रही है।
  • इन कचरों में शामिल जहरीले तत्त्व तथा उनके निष्पादन के तौर-तरीकों से मानव स्वास्थ्य बुरी तरह से ग्रभावित हो रहा है और विभिन्‍न प्रकार की बीमारियों में बढ़ोतरी हो रही है।
  • इन परिस्थितियों में यह नियम काफी महत्त्वपूर्ण हे कि जिसके तहत ई-कचरे का समुचित प्रबंधन सुनिश्चित हो सके। इससे पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा।
  • इस नियम के द्वारा एक प्राधिकरण केंद्र प्रणाली के तहत ई-कचरे को नष्ट करने ओर पुनर्चक्रण करने की प्रक्रिया सरल बनाई गई है।
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पूरे देश में एक प्राधिकार प्रदान करेगा।
  • इस नियम के तहत विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ई.पी.आर.) के अंतर्गत उत्पादकों को लाया जाएगा ओर इनके लक्ष्य भी निर्धारित किये जाएंगे।
  • इस नियम के द्वारा उत्पादकों को ई-कचरा इकट्ठा करने और आदान-प्रदान के लिये ज़िम्मेदार माना गया है।
  • इस नियम में बड़े उपभोक्ताओं को ई-कचरा इकट्ठा करने और उसे अधिकृत रूप से पुनःचक्रण करने वालों को प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। 
  • इस नियम के तहत विभिन्‍न उत्पादक पृथक्‌ उत्पादक दायित्व संगठन रख सकते हैं और ई-कचरा इकट्ठा करने तथा पर्यावरण के अनुकूल इसका निष्पादन सुनिश्चित करने के लिये बाध्य होंगे।
  • नियमों का उल्लंघन करने पर इसमें दंड का भी प्रावधान किया गया है।
  • इस नियम के तहत विभिन्‍न उत्पादक पृथक्‌ उत्पादक दायित्व संगठन रख सकते हैं और ई-कचरा इकट्ठा करने तथा पर्यावरण के अनुकूल इसका निष्पादन सुनिश्चित करने के लिये बाध्य होंगे।
  • इस नियम के तहत ई-कचरा नष्ट करने तथा पुनर्चक्रण करने के कार्य में संलग्न श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा कोशल विकास सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी राज्य सरकारों को प्रदान की गई है।
  • विदित हो कि इस नए नियम में अन्य के अतिरिक्त ई-कचरा के तहत कपैक्ट फ्लोरसेंट लैंप (सी.एफ.एल.) तथा मरकरी वाले अन्य लैंप ओर एसे अन्य उपकरण को भी शामिल किया गया है

FAQ

ई कचरा क्या है?

ई-अपशिष्ट से तात्पर्य ऐसे अपशिष्टों से है जिसका निर्माण इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अनुपयुक्त एवं बेकार हो जाने से होता है। इनमें अनेक खतरनाक रसायन एवं भारी धातुएँ, जैसे – सीसा, कैडमियम, बेरिलियम पाए जाते हें। ये अपशिष्ट प्रदूषण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य के लिये भी खतरनाक हें।

ई वेस्ट (e- waste) को प्रभावी तरीके के निपटान कैसे क्या जा सकता है?

परिशोधन ( शुद्धीकरण )
इस प्रक्रिया में ई-अपशिष्ट में से पहले उसमें शामिल धातुओं को अलग किया जाता है, उसके बाद उसका परिशोधन किया जाता है।
विखंडन/विनष्टीकरण
इस प्रक्रिया के लिये पहले ई-अपशिष्ट को विखंडन फैक्ट्री में इकट्ठा किया जाता है तथा इसमें उपस्थित विभिन्न धातुओं को अलग-अलग डिब्बों में डाला जाता है। इस स्तर पर गैस एवं द्रव्य अलग हो जाता है। अगला चरण विखंडन का आता है।
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