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जलवायु परिवर्तन क्या है | जलवायु परिवर्तन के कारण और परिणाम (jalvayu parivartan kya hai in hindi)

जलवायु क्या है what is climate

किसी भी स्थान का दीर्घकालिक मौसम जलवायु कहलाता है”

इसके तहत एक लंबे समय तक डाटा एकत्रित किया जाता है इसमें वायुमंडल का दबाव तापमान आदता हवा की गतिविधि तथा बादलों की गतिविधि आदि का दिन किया जाता है और जलवायु के बारे में निश्चित धारणा विकसित की जाती है भूगोल शास्त्रियों ने सदियों पूर्व जलवायु का अध्ययन प्रारंभ कर दिया था

जलवायु परिवर्तन से आशय जलवायु में दिखने वाले बदलावों से है यह बदलाव लाकर एवं मानव जनित कारणों से हो सकते हैं यह परिवर्तन एक दो एक दो महीने या बस में नहीं होता इसे होने में कई दशक या लाखों बरसों का भी समय लग सकता है इसका प्रभाव वैश्विक भी हो सकता है अथवा यह क्षेत्र विशेष में देख सकता है।

जलवायु परिवर्तन के कारण

वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन की जो समस्या हमारे सामने आई है उसका कोई एक निश्चित कारण नहीं है अनेक है जिनमें कुछ तो प्रगति से जुड़े हैं तो कुछ के लिए स्वार्थी मानव समाज उत्तरदाई है वस्तुतः प्राकृतिक कारणों से कहीं ज्यादा मानव जनित कारणों से जलवायु परिवर्तन जय साहब वैश्विक संकट हमारे सामने आया है पहले हम जलवायु कदम से जुड़े अपराध के कारणों पर दृष्टि डालते हैं

प्राकृतिक कारणों में मुख्य रूप से ज्वालामुखी महाद्वीपीय प्रथक्करण कथा महासागरीय धाराएं एवं जलवायु परिवर्तन के लिए उत्तरदाई है

ज्वालामुखी (volcano)

भूपर्पटी की बेदरा रहे ज्वालामुखी के लाते हैं जिनसे अंदर की धर्म चट्टान लावा भस्म तथा कैसे निकलती है ज्वाला मुखी फटते हैं तकिए से बाहर आते हैं जिसमें मुख्य रुप से सल्फर डाइऑक्साइड सल्फर डाइऑक्साइड क्लोरीन धाप कार्बन डाइऑक्साइड हाइड्रोजन सल्फर डाइऑक्साइड कार्बन मोनोऑक्साइड इत्यादि शामिल होती है एक ऐसे धूल के कण तथा रात आदि वायुमंडल में फेल कर जलवायु को प्रभावित करती हैं ज्वालामुखी तो शांत हो जाता है किंतु या लंबी समय अवधि तक सक्रिय रहकर जलवायु को प्रभावित करती हैं विस्फोट के कारण धूल और राख के कारण बहुत ऊपर तक जाते हैं और वर्षों तक वायुमंडल में विद्वान लेकर जलवायु को प्रभावित करते हैं

इन्हे भी देखेंग्रीन हाउस प्रभाव एवं हरित गृह प्रभाव (greenhouse effect in hindi)

महासागरीय जलधाराएं

पृथ्वी की सतह पर लवण अंचल का विशाल फैलाव महासागर कहलाता है पृथ्वी का 70% से भी कुछ अधिक हिस्सा जल आच्छादित है सागरों एवं महासागरों के रूप में यही कारण है कि जलवायु के निर्धारण में इनका महत्वपूर्ण योगदान होता है समय-समय पर समुद्र अपना ताप वायुमंडल में छोड़ता है जिससे जलवायु प्रभावित होती है काफी ताप जल भाजपा के रूप में धरती पर ग्रीनहाउस गैस के प्रभाव को बढ़ाता है इस प्रकार महासागरीय धाराएं भी जलवायु को प्रभावित करने में योगदान देती हैं

ग्रीन हाउस प्रभाव

ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण जलवायु में बदलाव देखने को मिल रहे हैं कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में उतार-चढ़ाव प्राकृतिक कारणों से भी होता है और मानव जनित कारणों से भी औद्योगिक क्रांति के बाद उद्योग धंधे तेजी  से कायम हुए तथा शहरीकरण की प्रक्रिया में गति आई इस कारण कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा वातावरण में बढ़नी शुरू हुई दूसरी तरफ वनों की अंधाधुंध कटाई और दोहन के कारण पेड़ पौधों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन में परिवर्तित करने की प्रक्रिया मंद पड़ी स्थिति दिन पर दिन बदतर होती चली गई कार्बन डाइऑक्साइड कि नहीं ऐसी अनेक खाता कैसे प्रचुर मात्रा में वायुमंडल में पहुंचने लगे इसमें थे नाइट्रोजन ऑक्साइड क्लोरोफ्लोरोकार्बन आदि शामिल है यह सब मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड के ग्रीन हाउस प्रभाव को बढ़ाकर जलवायु परिवर्तन से जुड़ी नई नई चुनौतियां पेश कर रही है

कृषि 

जलवायु परिवर्तन में कृषि से जुड़े क्रियाकलापों ने भी योगदान दिया है आज हम परंपरागत खेती के बजाय आधुनिक खेती की तरफ उन्मुख हैं रसायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग करती में बड़ा है जल मग्न चावल की जुताई से मीथेन का उत्सर्जन होता है जुगाली करने वाले पशु भी वातावरण में मिथेन का उत्सर्जन करते हैं इससे ग्रीन हाउस प्रभाव बढ़ता है

जीवाश्म ईंधन

जीवाश्म आधारित ईंधन के दोहन से भी कार्बन डाइऑक्साइड एवं नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसों का उत्सर्जन बड़ा है इस मानव जनित उत्सर्जन से भी जलवायु परिवर्तन की समस्या विकराल हुई है जीवाश्म आधारित ईंधन ईंधन से जहां ग्रीन हाउस गैसों का संचयन बड़ा है वही वायु एवं जल प्रदूषण भी बड़ा है अम्लीय करण भी इसी का नतीजा है कार्बन डाइऑक्साइड का सबसे ज्यादा उत्सर्जन जहां कोयले की दहन के कारण होता है वही इस समय तेल का दहन वायु में 30% तक कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करता है

इन्हे भी देखेंजैव-विविधता: का संरक्षण, कारण, प्रकार, मापन, लाभ : (Bio-diversity : importance, loss and conservation)

शहरीकरण और औद्योगीकरण

इसमें शहरीकरण और औद्योगीकरण के नाम पर अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रकृति का अंधाधुंध दोहन किया एक तरफ तो पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की तो दूसरी तरफ से हरीकरण के नाम   पर विनाश किया इको फ्रेंडली होकर कभी विकास की तरफ ध्यान ना दे कर पर्यावरण से हद तक जी की छेड़छाड़ की प्रदूषण को बढ़ाकर जलवायु परिवर्तन की समस्या को और वितरित बनाने में योगदान किया इसमें विकसित देश कुछ ज्यादा ही आगे रहे

जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम

  • बढ़ती गर्मी के कारण नदियों तालाबों झीलों एवं महासागरों आदि का पानी तेजी से भाप बनकर उड़ रहा है स्थिति और बाढ़ आदि की समस्या बढ़ी है बढ़ती गर्मी के कारण कुछ जगहों पर वायुमंडलीय दबाव अचानक कम हो जाता है जिससे आंधी तूफान का प्रकोप बढ़ जाता है
  • जलवायु परिवर्तन से कृषि भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित होती है तापमान की वृद्धि के कारण पौधों में नमी का अभाव हो जाता है अनेक फसलों की वृद्धि हेतु एक निश्चित सीमा के अंदर तापमान की आवश्यकता होती है तापमान की वृद्धि के कारण भी नष्ट होने लगते हैं मिट्टी में पानी की मात्रा कम हो जाने से उसमें में मौजूद कार्बन पदार्थों का विघटन एवं पुनर्चक्रण ठीक से नहीं हो पाता अतः सामान पैदावार के लिए भी अधिक खाद का उपयोग करना पड़ता है
  • सीमा से अधिक तापमान उत्पन्न होने पर नए प्रकार के कीड़े मकोड़े उत्पन्न होते हैं और उन पर सामान्य कीटनाशकों का कम प्रभाव पड़ता है प्रणाम थ्रू फसल की उत्पादकता एवं गुणवत्ता प्रभावित होती है
  • तापमान बढ़ने से हर माह यानी हरियाली में भारी कमी आती है इसके पर्यावरण असंतुलित होता है
  • तापमान बढ़ने से धर्मों की बर्फ पिघलने लगती है जिससे सागरों का जलस्तर बढ़ने से निकटवर्ती क्षेत्रों के जलमग्न होने का खतरा बढ़ जाता है 
  • आ समय वर्षा एवं सूखा की संभावना बढ़ जाती है
  • ग्रीन हाउस गैसों के प्रभाव के कारण ओजोन की सतह को क्षति पहुंच रही है सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों का अवशोषण कम होने से अनेक प्रकार की बीमारियां बढ़ रही है

इन्हें भी देखें – भारत का संवैधानिक विकास|1773 से 1947 ईस्वी तक | Constitution Development of India Hindi

निष्कर्ष

जलवायु परिवर्तन एक व्यक्ति एक चुनौती है जिससे उबरने के लिए समग्र संतुलन एवं सम्मिलित प्रयासों की आवश्यकता है धरती को बचाने के लिए वैश्विक पहल की आवश्यकता है सभी देशों को साथ मिलकर चलना होगा चाहे में विकसित देशों या विकासशील यदि इस समस्या के समाधान हेतु वैश्विक समुदाय पर्यावरण संरक्षण के भारतीय दर्शन से प्रेरणा ले तो इसे सकारात्मक परिणाम  सामने आने चाहिए।

FAQ-

जलवायु के कारण कौन कौन से हैं?

ज्वालामुखी (volcano), महासागरीय जलधाराएं, शहरीकरण और औद्योगीकरण

जलवायु से आप क्या समझते हैं?

किसी भी स्थान का दीर्घकालिक मौसम जलवायु कहलाता है

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