प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो मंदिर की विशेषताएँ और स्थापत्य | khajuraho mandir in hindi

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प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो मंदिर की विशेषताएँ और स्थापत्य | khajuraho mandir in hindi
प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो मंदिर की विशेषताएँ और स्थापत्य | khajuraho mandir in hindi
  • यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में 1986 ई. में खजुराहो के मंदिरों को किया गया है।
  • ये मंदिर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित हैं।
  • इन मंदिरों का निर्माण नागर शेली में हुआ है।
  • वर्तमान समय में इन मंदिरों की संख्या 20 है।
  • इन मंदिरों का निर्माण चंदेल शासकों द्वारा दसवीं और ग्यारहवीं शताब्दी में, क़रवाया गया था।
  • ये मंदिर समूह स्थापत्य कला और मूर्तिकला का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
  • यहाँ पर स्थित कंदरिया महादेव का मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यह नागर शैली में निर्मित है।
  • ये मंदिर हिंदू और जेन धर्म से संबंधित हैं।
  • यहाँ के मंदिरों की दीवारों पर नर-नारियों, अप्सराओं आदि के आकर्षक रूप-श्रृंगार में मूर्तियाँ सजीव प्रतीत होती हैं।
  • कंदरिया महादेव मंदिर का निर्माण चंदेल शासक विद्याधर ने करवाया था।

खजुराहो के मंदिरों का स्थापत्य

इन मंदिरों के बारे में सर्वप्रथम अंग्रेज़ी सेना के इंजीनियर टी.एस. बर्ट ने जानकारी दी। बर्ट ने मंदिरों की विशेषताओं को एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल के समक्ष प्रस्तुत किया। इसके पश्चात्‌ सरकार का ध्यान इन मंदिरों पर गया। इन मंदिरों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

यहाँ अधिकांश मंदिरों का निर्माण नागर शैली में हुआ है तथा मंदिरों के निर्माण में पन्ना घाटी के बलुआ पत्थरों के साथ ग्रेनाइट का उपयोग किया गया।

सभी मंदिरों के शिखर एक निश्चित रेखा में हैं तथा इन मंदिरों का निर्माण एक चबबूतरे पर किया गया हे। मंदिरों के शिखरों में ढलाव देखने को मिलता है अर्थात्‌ बड़ा शिखर, फिर उससे छोटा, फिर और छोटा। इस प्रकार क्रमिक रूप से छोटे होते जाते हें। है

खजुराहो उपशैली का विकास 10वीं से 13वीं शताब्दी के बीच हुआ। चंदेल शासकों द्वारा इस शैली को पर्याप्त संरक्षण प्रदान किया गया।

इन मंदिर में परकोटे का पूर्णतः: अभाव है अर्थात्‌ मंदिरों के चारों ओर दीवार नहीं है।

इन मंदिरों कं शिखरों पर छोटे-छोटे शिखर संलग्न हैं जिन्हें उरुश्रृंग कहते हैं। उरुश्रृंग व ‘अंतराल’ बुंदेलखंड सशाप्त्य की विशेषता है। अंतराल गर्भगृह ओर बरामद के गलियारे को कहते हैं।

मंदिरों में बने उरुश्रृंगो से मंदिर की आकृति और भी अधिक सुंदर लगती हे।

इन मंदिरों की दीवारों में बनी खिड़कियों में देवी-देवताओं, अप्सरा के अलावा संभाोगरत प्रतिमाएं तथा पशुआं की छोटी-छोटी मूर्तियाँ लगी हुई है।

मंदिर के प्रवेश द्वार के ऊपर मकर मुख की आकृति बनी होने के कारण इसे मकर तोरण कहा जाता है।

मंदिरों के गर्भगृह के चारों ओर परिक्रमा पथ बना हुआ है तथा मंदिरों के सभी भाग एक-दूसरे से अविच्छिन्न रूप से जुडे हुए हैं।

खजुराहो के पूर्वी समूह में जवारी, वामन मंदिर तथा जैन मंदिरों में पा्श्वनाथ, आदिनाथ घटाई मंदिर शामिल है।

पश्चिमी समूह में कंदरिया महादेव, लक्ष्मण, मतंगेश्वर, चित्रगुप्त आदि मंदिर हैं।

खजुराहो के प्रमुख मंदिर

कंदरिया महादेव मंदिर

  • खजुराहो का सबसे श्रेष्ठ मंदिर कंदरिया महादेव मंदिर है जो अपने शिखर और अलंकरणों के कारण विशिष्ट पहचान रखता है
  • इस मंदिर तक पहुँचने के लिये सीढ़ियों से होकर 13 चबूतरों पर चढ़ना होता है जिस पर यह मंदिर बना हुआ है
  • इसके अंगों में एक ढलाव का क्रम देखने को मिलता है। पहले अंग की तुलना में दूसरा अंग ऊँचाई पर बना हुआ है
  • इस मंदिर का गर्भगृह सबसे अधिक ऊँचाई पर अंत में बना हुआ है।
  • मंदिर के मुख्य कक्ष में महादेव की मूर्ति जबकि पूर्वी, पश्चिमी, उत्तरी, दक्षिणी कोनों में बने आलों में क्रमश: ब्रह्मा, विष्णु, महेश की प्रतिमाएँ लगी हैं।
  • इस मंदिर प्रमुख विशेषता इसके विभिन्न भागो पर किया गया मूर्तन है इस मंदिर की विशेषता इसकी दीवारों पर की गई चित्रकारी है।

लक्ष्मण मंदिर

  • चदेल वश के शासक यशोवर्मन द्वारा इस मंदिर का निर्माण 930-50 ई, के भध्य करवाया गया था।
  • यह मंदिर सम्मिलित रूप से हिंदू तथा जैन धर्मों को समर्पित है।
  • इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की त्रिमुखी प्रतिमा स्थापित है जिसका एक मुख मानव का, दूसरा सिंह का और तीसरा सूअर का है।
  • इस मंदिर को दोवारों पर लगभग 600 हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों की नक्काशी की गई है।
  • यह मंदिर नागर और उड़िया शैली का सम्मिश्रण है। सामान्य ऊँचाई पर स्थित यह मंदिर लाल बलुआ पत्थरों से निर्मित है
  • इस मंदिर के आधार के चारों ओर हाथी की मूर्तियाँ तथा अन्य प्रतीकात्मक मूर्तियाँ बनी हुई

चतुर्भुज मंदिर

  • खजुराहो में स्थित यह एकमात्र मंदिर है मिथुन प्रतिमाओं का अभाव है।
  • इस मंदिर का भी निर्माण लाल बलुआ पत्थरों से हुआ हे।
  • इस मंदिर से हमें शिल्पकला की अवनति की जानकारी प्राप्त होती है क्योंक्रि इसकी कलात्मकता में वह सूक्ष्मता नही दिखती जो खजुराहो क॑ अन्य मंदिरों में मिलती है।
  • इस मंदिर में बनी मूर्तियों में सजीवता का अभाव है।

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चित्रगुप्त मंदिर

खजुगहों क॑ मंदिर समूहों में शामिल यह एकमात्र मंदिर है जो सूर्य देवता को समर्पित हैं।

इस मंदिर के गर्भगृह में स्थापित सूर्य की प्रतिमा को सात घोड़ों पर स्थापित दिखाया गया है।

इन घोड़ों के माध्यम से सूर्य क प्रकाश में विधमान सात रंगों को दिखाने का प्रयत्न किया गया है।

यह मंदिर खजुगहों समृह के मंदिरों के पश्चिमी समूह का एक प्रमुख मंदिर है।

दूल्हादेव का मंदिर

यह मंदिर खजुगहों के दक्षिण समूह के मंदिरो शामिल है तथा भगवान शंकर को समर्पित है।

इस मंदिर में दूल्हादेव शिव की मूर्ति विराजमान है

इस मंदिर की सर्वप्रमुख विशेषता यह है कि इसमें सहस्रमुखी शिवलिंग स्थापित है

यह मंदिर खजुराहो के सभी मंदिरो में प्राचीन है।

इस मंदिर के चित्रकार का नाम यहाँ वर्णित है। इसे वसल कहते थे।

इस मंदिर में चित्रकार द्वारा अप्सराओं की प्रतिमाओं को इस प्रकार उकेरा गयी है कि ये निर्बाध जीवन का प्रतीक लगती है।

इस मंदिर की भीतरी व बाहरी दीवारों पर मिथुन कलाओं को प्रदर्शित करती अनेक मूर्तियाँ बनी हुई हैं।

कुछ इतिहासकारों द्वारा इस मंदिर को कुँवरनाथ मंदिर भी कहा जाता हैं

प्रमुख questions –

खजुराहो का मंदिर किसने बनवाया था?

खजुराहो के मंदिर चंदेल वंश के राजाओ द्वारा बनवाए गए है।

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