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राष्ट्रीय आय क्या है। परिभाषा ,महत्व ,अवधारणा राष्ट्रीय आय की गणना की विधियाँ ,( rashtriya aay kya hai)

राष्ट्रीय आय क्या है। परिभाषा ,महत्व ,अवधारणा  राष्ट्रीय आय की गणना की विधियाँ ,( rashtriya aay kya hai)

राष्ट्रीय आय (national income) अर्थव्यवस्था की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जो नीति निर्माण और कल्याणकारी राज्य की दिशा में महत्व पूर्ण भूमिका निभाती है। राष्ट्रीय आय देश की उत्पादन क्रियाओ का माप होती है। राष्ट्रीय आय की गणना के अंतगर्त प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण के द्वारा अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में संतुलन बनाये रखने व प्राथमिकताओं को स्थापित करने में सहायता मिलती है। राष्ट्रीय आय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण सूचकांग है

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के आर्थिक निष्पादन की जानकारी का प्रमुख साधन राष्ट्रीय आय है। स्वतंत्रता के पश्चात भारत सरकार ने राष्ट्रीय आय का अनुमान लगाने के लिए वर्ष 1949 में राष्ट्रीय आय समिति का गठन किया। जिसके अध्यक्ष PC महालोबिस थे।

राष्ट्रीय आय की परिभाषा (definition of National Income)

राष्ट्रीय आय से अभिप्राय किसी राष्ट्र की एक वर्ष के दौरान आर्थिक क्रियाओ के परिणाम स्वरुप उत्पादित अंतिम ‘ वस्तुओं एवं सेवाओं ‘के मौद्रिक मूल्य से होता है।

दूसरे शब्दो में कहे तो किसी एक लेखा वर्ष की अवधि के अंतर्गत किसी अर्थव्यवस्था में उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के बाजार मूल्य को राष्ट्रीय आय कहा जाता है। राष्ट्रीय आय की गणना में देश के निवासियो द्वारा घरेलु एवं विदेशो से अर्जित आय को सम्मलित किया जाता है।

राष्ट्रीय आय को विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने निम्नलिखित रूप में परिभाषित किया है

मार्सल के अनुसार राष्ट्रीय आय ( National income Accoraing to Marshal )

  • राष्ट्रीय आय की गणना वार्षिक आधार पर होती है।
  • वार्षिक कुल उत्पादन में से मशीनों की टूट -पूट , घिसावट और उत्पादन सम्बन्धी व्यय आदि को घटा दिया जाता है।
  • राष्ट्रीय आय में विदेशी विनियोगो से प्राप्त होने वाली राशि को जोड़ दिया जाता है।
  • व्यक्तियों की वे सेवाएं , जो परिवार सदस्यों एवं मित्रों को बिना मूल्य प्राप्त हो जाती है।
  • निजी संपत्ति या सार्वजानिक सम्पत्ति से लाभ इत्यादि को राष्ट्रीय आय में नहीं जोड़ा जाता है।

पीगू के अनुसार राष्ट्रीय आय ( National income according to Pigou )

राष्ट्रीय आय समाज की वस्तुगत आय होती है। ,जिसमे विदेशो से प्राप्त आय भी सम्मलित है। यह वह भाग होती है। जिसको द्रव्य के रूप में मापा जा सकता है।

फिशर के अनुसार राष्ट्रीय आय ( National income according to Fishar )

राष्ट्रीय आय में केवल उन सेवाओं को शामिल किया जाता है। जो अंतिम रूप से उपभोक्ताओं को उपभोग के लिए प्राप्त होती है। फिर चाहे वे भौतिक वातावरण से प्राप्त हो अथवा मानवीय वातावरण से।

राष्ट्रीय आय की अवधारणा ( Concept of national income )

राष्ट्रीय आय में किसी एक समय पर उपलब्ध बस्तुओं के स्टॉक को नहीं , बल्कि किसी समयावधि में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं को शामिल किया जाता है। राष्ट्रीय आय की अवधारणा में सभी वस्तुओं एवं सेवाओं की बाजार कीमत पर गणना की जाती है। और एक वस्तु की कीमत एक बार ही शामिल किया जाता है। इसलिए अंतिम वस्तुओ एवं सेवाओं का मूल्य ही शामिल किया जाता है। ताकि दोहराव से बचा जा सके।

भारत में राष्ट्रीय आय की गणना ( National income calculation in India )

भारत में राष्ट्रीय आय का अनुमान सर्वप्रथम दादाभाई नौरोजी ने वर्ष 1968 में अपनी पुस्तक प्रॉपर्टी एंड अनब्रिटिश रूल इन इंडिया ( poverty and un-british rule in india ) में लगाया। गौरतलब है कि वैज्ञानिक विधि से राष्ट्रीय आय की गणना के लिए वर्ष 1931-32 में वी.के.आर.वी. राव ने उत्पादन प्रणाली को आधार बनाया।

राष्ट्रीय आय की गणना ( calculation of national income )

भारत में राष्ट्रीय आय की गणना निम्न लिखित 2 आधार पर की जाती है।

1. चालू कीमतों पर

2. स्थिर कीमतों पर

चालू कीमतों पर राष्ट्रीय आय ( National income at current price )

किसी देश के निवासियो द्वारा एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के चालू मूल्यों का योग मौद्रिक राष्ट्रीय आय या चालू कीमतों पर राष्ट्रीय आय कहलाती है।

स्थिर कीमतों पर राष्ट्रीय आय ( National income at constant price )

किसी एक लेखा वर्ष को आधार मानकर उस वर्ष के मूल्यों पर राष्ट्रीय आय की गणना करना स्थिर कीमतों पर राष्ट्रीय आय कहलाती है।

अभी भारत में स्थिर कीमतों पर राष्ट्रीय आय की गणना 2011-12 के स्थिर कीमतों के आधार पर की जाती है।

राष्ट्रीय आय मापने की विधियाँ ( Measuring Methods of National Income )

भारत में राष्ट्रीय आय मापने की तीन प्रचलित विधियाँ है।

उत्पाद गणना विधि ( product calculation method )

उत्पाद विधि को वस्तु सेवा विधि भी कहा जा सकता है इसके अंतरगर्त यह आकलन किया जाता है। की अंतिम उत्पाद में प्रत्येक उद्योग ने क्या योगदान दिया है। इस विधि के अंतर्गत सर्वप्रथम देश में एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं वाम सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को लेते है। यह बाजार मूल्य पर किया जाता है।

आय गणना विधि ( income calculation method )

आय गणना विधि के अंतर्गत राष्ट्रीय आय की गणना में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत व्यक्तियों एवं व्यवसायक उपक्रमों की शुद्ध आय को शामिल किया जाता है।

राष्ट्रीय आय = कुल लगान + कुल मजदूरी + कुल लाभ

व्यय गणना विधि ( Expenditure calculation method )

व्यय गणना विधि के अंतर्गत कुल उपभोग व्यय एवं कुल बचत को शामिल किया जाता है।

राष्ट्रीय आय = कुल उपभोग व्यय + कुल बचत

भारत में सामान्यता रास्टीय आय की गणना के लिए उत्पाद विधि एवं आय विधि का मिश्रित रूप प्रचलित है।

राष्ट्रीय आय में शामिल न होने वाली मदे/वस्तुएँ ( items not included in National income )

  • राष्ट्रीय आय में मध्य्वर्ती वस्तुओं को शामिल नहीं किया जाता है
  • राष्ट्रीय आय में पुरानी बस्तुओं की गणना नहीं की जाती है
  • घरेलु सेवाओं जैसे – कपडे धोना , खाना बनाना , आदि को राष्ट्रीय आए में शामिल नहीं किया जाता है।
  • अंश पत्र खरीदने बेचने को राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता है।
  • राष्ट्रीय आय मुद्रा के मूल्य में ही मापा जाता है।
  • हस्तांतरण भुगतान जैसे – पेंशन ,बेरोजगारी ,भत्ता , बैंको में जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज को राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता है।
  • आयकर ,निगम कर को भी राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता है।
  • गैर -क़ानूनी गतिबिधियाँ – कालाबाजारी ,तस्करी ,जुआ आदि से प्राप्त आय को राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता है।

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